बालकाण्ड · दोहा 356 · दोहा/सोरठा
घोर निसाचर बिकट भट समर गनहिं नहिं काहु।।
घोर निसाचर बिकट भट समर गनहिं नहिं काहु।।
मारे सहित सहाय किमि खल मारीच सुबाहु।।356।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.356 · पुस्तक पृ. 336, 336
भावार्थ और शब्दार्थ
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1घोर निसाचर बिकट भट समर गनहिं नहिं काहु।।
वे भयानक राक्षस विकट योद्धा हैं, जो युद्ध में किसी को कुछ नहीं समझते।
English explanation
Those dreadful demons are formidable warriors who regard no one as a threat in battle.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| घोर | भयानक | dreadful |
| निसाचर | राक्षस | demons |
| बिकट | विकराल; दुर्जेय | formidable |
| भट | योद्धा | warriors |
| समर | युद्ध में | in battle |
| गनहिं | गिनते; महत्त्व देते | reckon with |
| नहिं | नहीं | not |
| काहु | किसी को | anyone |
2 मारे सहित सहाय किमि खल मारीच सुबाहु।।356।।
दुष्ट मारीच और सुबाहु को उनके सहायकों सहित तुमने कैसे परास्त किया?
English explanation
How did you overcome the wicked Maricha and Subahu, together with their allies?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मारे | मारा; परास्त किया | struck down; overcame |
| सहित | सहित | together with |
| सहाय | सहायकों के | their allies |
| किमि | कैसे | how |
| खल | दुष्ट | wicked |
| मारीच | मारीच राक्षस | Maricha, the demon |
| सुबाहु | सुबाहु राक्षस | Subahu, the demon |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 356
- स्रोत अभिलेख
- 1.356
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 336, 336
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