बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम भगत हित नर तनु धारी। सहि संकट किए साधु सुखारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामचन्द्रजीने भक्तोंके हितके लिये मनुष्य-शरीर धारण करके स्वयं कष्ट सहकर साधुओंको सुखी किया; परन्तु भक्तगण प्रेमके साथ नामका जप करते हुए सहजहीमें आनन्द और कल्याणके घर हो जाते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 45 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम भगत हित नर तनु धारी। सहि संकट किए साधु सुखारी।।
नामु सप्रेम जपत अनयासा। भगत होहिं मुद मंगल बासा।।
स्रोत अभिलेख 1.24 · पुस्तक पृ. 45, 46
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम भगत हित नर तनु धारी। सहि संकट किए साधु सुखारी।।
English explanation
Rama assumed a human body for his devotees’ welfare and endured hardships to bring happiness to the virtuous.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम | Lord Rama |
| भगत | भक्तों के | of devotees |
| हित | हित के लिए | for the welfare |
| नर | मनुष्य का | human |
| तनु | शरीर | body |
| धारी | धारण किया | assumed |
| सहि | सहकर | having endured |
| संकट | कष्ट और विपत्तियाँ | hardships and dangers |
| किए | बनाया | made |
| साधु | साधुजनों को | the virtuous |
| सुखारी | सुखी | happy |
2 नामु सप्रेम जपत अनयासा। भगत होहिं मुद मंगल बासा।।
English explanation
By lovingly repeating Rama’s name, devotees effortlessly become abodes of joy and auspiciousness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नामु | राम का नाम | Rama’s name |
| सप्रेम | प्रेम के साथ | with love |
| जपत | जपने से | by repeating |
| अनयासा | बिना कठिन प्रयास के | without difficulty |
| भगत | भक्त | devotees |
| होहिं | हो जाते हैं | become |
| मुद | आनंद के | of joy |
| मंगल | मंगल के | of auspiciousness |
| बासा | निवास | abodes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 45
- सहायक विषय
- श्रीनाम-वन्दना और नाम-महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 45, 46
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।