बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम कीन्ह चाहहिं सोइ होई। करै अन्यथा अस नहिं कोई।।
मूल पाठ
राम कीन्ह चाहहिं सोइ होई। करै अन्यथा अस नहिं कोई।।
संभु बचन मुनि मन नहिं भाए। तब बिरंचि के लोक सिधाए।।
स्रोत अभिलेख 1.128 · पुस्तक पृ. 139, 139
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामचन्द्रजी जो करना चाहते हैं, वही होता है, ऐसा कोई नहीं जो उसके विरुद्ध कर सके। श्रीशिवजीके वचन नारदजीके मनको अच्छे नहीं लगे, तब वे वहाँसे ब्रह्मलोकको चल दिये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 139 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 राम कीन्ह चाहहिं सोइ होई। करै अन्यथा अस नहिं कोई।।
English explanation
AI-generated draft interpretation: Whatever Rama wishes to do happens. No one can make it otherwise.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| कीन्ह | करना | to do |
| चाहहिं | चाहते हैं | wishes |
| सोइ | वही | that very thing |
| होई | होता है | happens |
| करै | कर सके | can make |
| अन्यथा | अन्य प्रकार से | otherwise |
| अस | ऐसा | such |
| नहिं | नहीं | not |
| कोई | कोई व्यक्ति | anyone |
2 संभु बचन मुनि मन नहिं भाए। तब बिरंचि के लोक सिधाए।।
English explanation
Shiva’s words did not please the sage Narada. He then departed for Brahma’s realm.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संभु | शिव | Shiva |
| बचन | वचन | words |
| मुनि | मुनि नारद के | of the sage Narada |
| मन | मन को | to the mind |
| नहिं | नहीं | not |
| भाए | अच्छे लगे | were pleasing |
| तब | तब | then |
| बिरंचि | ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| के | के | of |
| लोक | लोक में | to the realm |
| सिधाए | चले गए | departed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.128
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 139
- सहायक विषय
- नारदका अभिमान और मायाका प्रभाव
- मुद्रित पृष्ठ
- 139, 139
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।