बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि मनोहर चारिउ जोरीं। सारद उपमा सकल ढँढोरीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दचारों मनोहर जोडिय़ोंको देखकर सरस्वतीने सारी उपमाओंको खोज डाला; पर कोई उपमा देते नहीं बनी, क्योंकि उन्हें सभी बिलकुल तुच्छ जान पड़ीं। तब हारकर वे भी श्रीरामजीके रूपमें अनुरक्त होकर एकटक देखती रह गयीं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 331 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
देखि मनोहर चारिउ जोरीं। सारद उपमा सकल ढँढोरीं।।
देत न बनहिं निपट लघु लागी। एकटक रहीं रूप अनुरागीं।।
स्रोत अभिलेख 1.349 · पुस्तक पृ. 330, 331
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 देखि मनोहर चारिउ जोरीं। सारद उपमा सकल ढँढोरीं।।
English explanation
Seeing all four lovely couples, Sarasvati searched through every possible comparison.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having seen |
| मनोहर | मन को हरने वाली | captivating |
| चारिउ | चारों | all four |
| जोरीं | जोड़ियाँ | couples |
| सारद | वाणी की देवी सरस्वती | Sarasvati, goddess of speech |
| उपमा | तुलना के उदाहरण | comparisons or similes |
| सकल | सभी | all |
| ढँढोरीं | खोज डालीं | searched through |
2 देत न बनहिं निपट लघु लागी। एकटक रहीं रूप अनुरागीं।।
English explanation
But no comparison could be offered, for all seemed utterly inadequate. Enamored of that beauty, Sarasvati remained gazing steadily.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देत | देते हुए; उपमा देने में | in offering a comparison |
| न | नहीं | not |
| बनहिं | बन पड़ती हैं | prove possible |
| निपट | बिल्कुल | utterly |
| लघु | तुच्छ या अपर्याप्त | insignificant or inadequate |
| लागी | लगीं | seemed |
| एकटक | बिना दृष्टि हटाए | with an unwavering gaze |
| रहीं | रह गईं | remained |
| रूप | सौंदर्य में | with the beauty |
| अनुरागीं | अनुरक्त | enamored |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.349
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 331
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 330, 331
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।