बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जो तुम्ह कहा सो मृषा न होई। मोरें मन प्रतीति अति सोई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दआपने जो कहा वह झूठ नहीं हो सकता, मेरे मनमें यह बड़ा (पूरा) विश्वास है। तब शिवजीने ध्यान करके देखा और सतीजीने जो चरित्र किया था, सब जान लिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 77 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जो तुम्ह कहा सो मृषा न होई। मोरें मन प्रतीति अति सोई।।
तब संकर देखेउ धरि ध्याना। सतीं जो कीन्ह चरित सब जाना।।
स्रोत अभिलेख 1.56 · पुस्तक पृ. 76, 77
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जो तुम्ह कहा सो मृषा न होई। मोरें मन प्रतीति अति सोई।।
English explanation
“What you said cannot be false; I have firm faith in that very statement.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो बात | what; the statement that |
| तुम्ह | आपने | you, as the speaker |
| कहा | कहा | said |
| सो | वह | that |
| मृषा | असत्य | false |
| न | नहीं | not |
| होई | हो सकता | can be |
| मोरें | मेरे | in my |
| मन | मन में | mind |
| प्रतीति | विश्वास | faith; conviction |
| अति | बहुत दृढ़ | very strong |
| सोई | उसी बात का | in that very statement |
2 तब संकर देखेउ धरि ध्याना। सतीं जो कीन्ह चरित सब जाना।।
English explanation
Then Shiva looked through meditation and learned everything Sati had done.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| संकर | शंकर ने; शिव ने | Shiva, as the subject |
| देखेउ | देखा | saw; perceived |
| धरि | लगाकर | having entered into |
| ध्याना | ध्यान | meditation |
| सतीं | सती ने | Sati, as the subject |
| जो | जो | whatever |
| कीन्ह | किया | had done |
| चरित | आचरण; कृत्य | conduct; deeds |
| सब | सारा | all |
| जाना | जान लिया | came to know |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.56
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 77
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 76, 77
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।