बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जानहिं तीनि काल निज ग्याना। करतल गत आमलक समाना।।
मूल पाठ
जानहिं तीनि काल निज ग्याना। करतल गत आमलक समाना।।
औरउ जे हरिभगत सुजाना। कहहिं सुनहिं समुझहिं बिधि नाना।।
स्रोत अभिलेख 1.3 · पुस्तक पृ. 52, 52
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे अपने ज्ञानसे तीनों कालोंकी बातोंको हथेलीपर रखे हुए आँवलेके समान (प्रत्यक्ष) जानते हैं। और भी जो सुजान (भगवान्की लीलाओंका रहस्य जाननेवाले) हरिभक्त हैं, वे इस चरित्रको नाना प्रकारसे कहते, सुनते और समझते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 52 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जानहिं तीनि काल निज ग्याना। करतल गत आमलक समाना।।
English explanation
Through their own knowledge, they know all three divisions of time as clearly as an amla fruit resting in the palm.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानहिं | जानते हैं | know |
| तीनि | तीनों | all three |
| काल | काल—भूत, वर्तमान और भविष्य | times—past, present, and future |
| निज | अपने | their own |
| ग्याना | ज्ञान से | through knowledge |
| करतल | हथेली में | in the palm |
| गत | स्थित, रखा हुआ | resting, placed |
| आमलक | आँवले का फल | amla fruit |
| समाना | के समान | like |
2 औरउ जे हरिभगत सुजाना। कहहिं सुनहिं समुझहिं बिधि नाना।।
English explanation
Other discerning devotees of Hari also tell, hear, and understand this story in various ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| औरउ | अन्य भी | others also |
| जे | जो | who |
| हरिभगत | हरि के भक्त | devotees of Hari |
| सुजाना | समझदार, ज्ञानी | discerning, wise |
| कहहिं | कहते हैं | tell |
| सुनहिं | सुनते हैं | listen |
| समुझहिं | समझते हैं | understand |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| नाना | अनेक | various |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 52
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 52, 52
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।