बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जनक राज गुन सीलु बड़ाई। प्रीति रीति संपदा सुहाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दराजा जनकके गुण, शील, महत्त्व, प्रीतिकी रीति और सुहावनी सम्पत्तिका वर्णन राजाने भाटकी तरह बहुत प्रकारसे किया। जनकजीकी करनी सुनकर सब रानियाँ बहुत प्रसन्न हुईं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 335 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जनक राज गुन सीलु बड़ाई। प्रीति रीति संपदा सुहाई।।
बहुबिधि भूप भाट जिमि बरनी। रानीं सब प्रमुदित सुनि करनी।।
स्रोत अभिलेख 1.354 · पुस्तक पृ. 334, 335
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जनक राज गुन सीलु बड़ाई। प्रीति रीति संपदा सुहाई।।
English explanation
The account described King Janaka’s virtues, good character, greatness, affection, customs, and splendid wealth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनक | सीता के पिता जनक | Janaka, Sita’s father |
| राज | राजा | king |
| गुन | गुण | virtues |
| सीलु | सुशील स्वभाव | good character |
| बड़ाई | महानता | greatness |
| प्रीति | प्रेम | affection |
| रीति | रीति-व्यवहार | customs and conduct |
| संपदा | धन-वैभव | wealth and prosperity |
| सुहाई | मनोहर | splendid |
2 बहुबिधि भूप भाट जिमि बरनी। रानीं सब प्रमुदित सुनि करनी।।
English explanation
The king described these things in many ways, like a bard; all the queens were delighted to hear of the conduct and deeds he recounted.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुबिधि | अनेक प्रकार से | in many ways |
| भूप | राजा दशरथ ने | King Dasharatha |
| भाट | यश गाने वाला भाट | a praise-singing bard |
| जिमि | की तरह | like |
| बरनी | वर्णन किया | described |
| रानीं | रानियाँ | the queens |
| सब | सभी | all |
| प्रमुदित | बहुत प्रसन्न | greatly delighted |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| करनी | कार्य और व्यवहार | deeds and conduct |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.354
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 335
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 334, 335
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।