अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सीता सचिव सहित दोउ भाई। सृंगबेरपुर पहुँचे जाई।।
मूल पाठ
सीता सचिव सहित दोउ भाई। सृंगबेरपुर पहुँचे जाई।।
उतरे राम देवसरि देखी। कीन्ह दंडवत हरषु बिसेषी।।
स्रोत अभिलेख 2.87 · पुस्तक पृ. 415, 416
भावार्थ
मूल पाठ के बादसीताजी और मन्त्रीसहित दोनों भाई शृंगवेरपुर जा पहुँचे। वहाँ गङ्गाजीको देखकर श्रीरामजी रथसे उतर पड़े और बड़े हर्षके साथ उन्होंने दण्डवत् की॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 415 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सीता सचिव सहित दोउ भाई। सृंगबेरपुर पहुँचे जाई।।
English explanation
The two brothers, Rama and Lakshmana, reached Sringaberpur with Sita and the minister Sumantra.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीता | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama’s wife |
| सचिव | मंत्री सुमंत्र | the minister Sumantra |
| सहित | के साथ | together with |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई, राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
| सृंगबेरपुर | सृंगबेरपुर नामक नगर | the town of Sringaberpur |
| पहुँचे | पहुँचे | arrived |
| जाई | जाकर | having gone |
2 उतरे राम देवसरि देखी। कीन्ह दंडवत हरषु बिसेषी।।
English explanation
Seeing the Ganges, Rama got down from the chariot and prostrated himself with great joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उतरे | रथ से नीचे उतरे | got down from the chariot |
| राम | राम | Rama |
| देवसरि | देवताओं की नदी, गंगा | the divine river, the Ganges |
| देखी | देखकर | having seen |
| कीन्ह | किया | performed |
| दंडवत | भूमि पर सीधे लेटकर प्रणाम | full-length prostration |
| हरषु | हर्ष, आनंद | joy |
| बिसेषी | विशेष, बहुत अधिक | great; exceptional |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.87
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 415
- सहायक विषय
- श्रीरामका शृङ्गवेरपुर पहुँचना, निषादके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 415, 416
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।