अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धन्य भरत जय राम गोसाईं। कहत देव हरषत बरिआई।
मूल पाठ
धन्य भरत जय राम गोसाईं। कहत देव हरषत बरिआई।
मुनि मिथिलेस सभाँ सब काहू। भरत बचन सुनि भयउ उछाहू।।
स्रोत अभिलेख 2.309 · पुस्तक पृ. 602, 603
भावार्थ
मूल पाठ के बाद'भरतजी धन्य हैं, स्वामी श्रीरामजीकी जय हो! ऐसा कहते हुए देवता बलपूर्वक (अत्यधिक) हॢषत होने लगे। भरतजीके वचन सुनकर मुनि वसिष्ठजी, मिथिलापति जनकजी और सभामें सब किसीको बड़ा उत्साह (आनन्द) हुआ॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 602 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 धन्य भरत जय राम गोसाईं। कहत देव हरषत बरिआई।
English explanation
The gods exclaim, “Blessed is Bharata! Victory to Lord Rama!” and cannot help rejoicing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धन्य | धन्य हैं | blessed |
| भरत | राम के भाई भरत | Bharata, Rama’s brother |
| जय | जय हो | victory to |
| राम | श्रीराम | Rama |
| गोसाईं | स्वामी | Lord |
| कहत | कहते हुए | saying |
| देव | देवता | the gods |
| हरषत | हर्षित होते हुए | rejoicing |
| बरिआई | बरबस | irresistibly |
2 मुनि मिथिलेस सभाँ सब काहू। भरत बचन सुनि भयउ उछाहू।।
English explanation
Hearing Bharata’s words, the sages, the king of Mithila, and everyone in the assembly felt renewed enthusiasm.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनियों को | the sages |
| मिथिलेस | मिथिला के राजा जनक को | Janaka, king of Mithila |
| सभाँ | सभा में | in the assembly |
| सब | सभी | every |
| काहू | व्यक्ति को | person |
| भरत | भरत के | Bharata’s |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| भयउ | हुआ | arose |
| उछाहू | उत्साह | enthusiasm |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.309
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 602
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 602, 603
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।