अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देस काल अवसर अनुसारी। बोले बचन बिनीत बिचारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्ददेश, काल और अवसरके अनुकूल विचारकर विनीत वचन कहे—हे तात! मैं कुछ कहता हूँ, यह ढिठाई करता हूँ। इस अनौचित्यको मेरी बाल्यावस्था समझकर क्षमा कीजियेगा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 381 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
देस काल अवसर अनुसारी। बोले बचन बिनीत बिचारी।।
तात कहउँ कछु करउँ ढिठाई। अनुचितु छमब जानि लरिकाई।।
स्रोत अभिलेख 2.45 · पुस्तक पृ. 381, 381
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 देस काल अवसर अनुसारी। बोले बचन बिनीत बिचारी।।
English explanation
Considering the place, time, and occasion, Rama spoke humble words suited to them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देस | स्थान | place |
| काल | समय | time |
| अवसर | अवसर; परिस्थिति | occasion; circumstances |
| अनुसारी | के अनुरूप | in keeping with |
| बोले | कहे | spoke |
| बचन | वचन | words |
| बिनीत | विनम्र | humble |
| बिचारी | विचार करके | after consideration |
2 तात कहउँ कछु करउँ ढिठाई। अनुचितु छमब जानि लरिकाई।।
English explanation
Father, let me venture to say something; forgive anything improper as a child’s immaturity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | पिताजी | Father |
| कहउँ | मैं कहूँ | let me say |
| कछु | कुछ | something |
| करउँ | मैं करूँ | let me commit |
| ढिठाई | धृष्टता; बोलने का साहस | audacity; boldness in speaking |
| अनुचितु | अनुचित बात या व्यवहार | anything improper |
| छमब | क्षमा कीजिए | please forgive |
| जानि | समझकर | regarding it as |
| लरिकाई | बालपन; बालक की नादानी | childhood immaturity |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.45
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 381
- सहायक विषय
- श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवध-वासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 381, 381
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।