अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कृपा अनुग्रह अंगु अघाई। कीन्हि कृपानिधि सब अधिकाई।।
मूल पाठ
कृपा अनुग्रह अंगु अघाई। कीन्हि कृपानिधि सब अधिकाई।।
राखा मोर दुलार गोसाईं। अपनें सील सुभायँ भलाईं।।
स्रोत अभिलेख 2.3 · पुस्तक पृ. 594, 595
भावार्थ
मूल पाठ के बादकृपानिधानने मुझपर साङ्गोपाङ्ग भरपेट कृपा और अनुग्रह, सब अधिक ही किये हैं (अर्थात् मैं जिसके जरा भी लायक नहीं था उतनी अधिक सर्वाङ्गपूर्ण कृपा आपने मुझपर की है)। हे गोसाईं! आपने अपने शील, स्वभाव और भलाईसे मेरा दुलार रखा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 595 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कृपा अनुग्रह अंगु अघाई। कीन्हि कृपानिधि सब अधिकाई।।
English explanation
The treasure of compassion abundantly bestowed mercy, favor, and acceptance, honoring me in every way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कृपा | दया | mercy |
| अनुग्रह | अनुग्रह; विशेष कृपा | favor; gracious kindness |
| अंगु | अपनापन; स्वीकार | acceptance as one's own |
| अघाई | भरपूर; तृप्ति तक | abundantly; to satisfaction |
| कीन्हि | की; प्रदान की | bestowed |
| कृपानिधि | कृपा के भंडार राम ने | Rama, the treasure of compassion |
| सब | हर प्रकार की | every kind of |
| अधिकाई | बढ़ाई; सम्मान | honor; esteem |
2 राखा मोर दुलार गोसाईं। अपनें सील सुभायँ भलाईं।।
English explanation
Through his gracious character, disposition, and goodness, my lord preserved his loving regard for me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राखा | बनाए रखा | preserved |
| मोर | मेरे प्रति | toward me |
| दुलार | दुलार; स्नेहपूर्ण मान | loving regard |
| गोसाईं | स्वामी राम ने | my lord Rama |
| अपनें | अपने | his own |
| सील | सौम्य आचरण से | through gracious character |
| सुभायँ | स्वभाव से | through his disposition |
| भलाईं | भलाई से | through goodness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 595
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 594, 595
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।