अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कूबर टूटेउ फूट कपारू। दलित दसन मुख रुधिर प्रचारू।।
मूल पाठ
कूबर टूटेउ फूट कपारू। दलित दसन मुख रुधिर प्रचारू।।
आह दइअ मैं काह नसावा। करत नीक फलु अनइस पावा।।
स्रोत अभिलेख 2.163 · पुस्तक पृ. 478, 479
भावार्थ
मूल पाठ के बादउसका कूबड़ टूट गया, कपाल फूट गया, दाँत टूट गये और मुँहसे खून बहने लगा। [वह कराहती हुई बोली—] हाय दैव! मैंने क्या बिगाड़ा? जो भला करते बुरा फल पाया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 479 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कूबर टूटेउ फूट कपारू। दलित दसन मुख रुधिर प्रचारू।।
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2 आह दइअ मैं काह नसावा। करत नीक फलु अनइस पावा।।
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स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.163
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 479
- सहायक विषय
- श्रीभरत-शत्रुघ्नका आगमन और शोक
- मुद्रित पृष्ठ
- 478, 479
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