अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कुबरिहि रानि प्रानप्रिय जानी। बार बार बड़ि बुद्धि बखानी।।
मूल पाठ
कुबरिहि रानि प्रानप्रिय जानी। बार बार बड़ि बुद्धि बखानी।।
तोहि सम हित न मोर संसारा। बहे जात कइ भइसि अधारा।।
स्रोत अभिलेख 2.23 · पुस्तक पृ. 362, 363
भावार्थ
मूल पाठ के बादकुबरीको रानीने प्राणोंके समान प्रिय समझकर बार-बार उसकी बड़ी बुद्धिका बखान किया और बोली—संसारमें मेरा तेरे समान हितकारी और कोई नहीं है। तू मुझ बही जाती हुईके लिये सहारा हुई है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 362 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कुबरिहि रानि प्रानप्रिय जानी। बार बार बड़ि बुद्धि बखानी।।
English explanation
AI-draft meaning: The queen regarded the hunchbacked Manthara as dear as her own life and repeatedly praised her great cleverness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुबरिहि | कुबड़ी मंथरा को | the hunchbacked Manthara |
| रानि | रानी कैकेयी ने | Queen Kaikeyi |
| प्रानप्रिय | प्राणों के समान प्रिय | dear as life itself |
| जानी | माना | regarded as |
| बार | बार | time |
| बार | बार | after time |
| बड़ि | बड़ी | great |
| बुद्धि | बुद्धिमानी | cleverness |
| बखानी | प्रशंसा की | praised |
2 तोहि सम हित न मोर संसारा। बहे जात कइ भइसि अधारा।।
English explanation
No one in the world cares for my welfare as you do. As I was being swept away, you became my support.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तोहि | तुम्हारे | you |
| सम | समान | like |
| हित | हितैषी | well-wisher |
| न | नहीं | not |
| मोर | मेरा | my |
| संसारा | संसार में | in the world |
| बहे | बहती हुई | being swept away |
| जात | जा रही | going along |
| कइ | की | of |
| भइसि | तुम बनी | you became |
| अधारा | सहारा | support |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 362
- सहायक विषय
- कैकेयीका कोपभवनमें जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 362, 363
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।