अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अमर नाग नर राम बाहुबल। सुख बसिहहिं अपनें अपने थल।।
मूल पाठ
अमर नाग नर राम बाहुबल। सुख बसिहहिं अपनें अपने थल।।
यह सब जागबलिक कहि राखा। देबि न होइ मुधा मुनि भाषा।।
स्रोत अभिलेख 2.285 · पुस्तक पृ. 581, 582
भावार्थ
मूल पाठ के बाददेवता, नाग और मनुष्य सब श्रीरामचन्द्रजीकी भुजाओंके बलपर अपने-अपने स्थानों (लोकों) में सुखपूर्वक बसेंगे। यह सब याज्ञवल्क्य मुनिने पहलेहीसे कह रखा है। हे देवि! मुनिका कथन व्यर्थ (झूठा) नहीं हो सकता॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 582 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अमर नाग नर राम बाहुबल। सुख बसिहहिं अपनें अपने थल।।
English explanation
Gods, Nagas, and humans will live happily in their respective abodes through the strength of Rama’s arms.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अमर | देवता | gods |
| नाग | नागजाति के प्राणी | Nagas, serpent beings |
| नर | मनुष्य | humans |
| राम | राम के | Rama’s |
| बाहुबल | भुजाओं के बल से | through the strength of his arms |
| सुख | सुख से | happily |
| बसिहहिं | निवास करेंगे | will dwell |
| अपनें | अपने-अपने | their respective |
| अपने | अपने | own |
| थल | स्थानों में | in abodes |
2 यह सब जागबलिक कहि राखा। देबि न होइ मुधा मुनि भाषा।।
English explanation
Yajnavalkya has already foretold all this. Lady, a sage’s words do not prove vain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| सब | सब | all |
| जागबलिक | मुनि याज्ञवल्क्य ने | sage Yajnavalkya |
| कहि | कह | having said |
| राखा | रखा है | has already stated |
| देबि | हे देवी | O lady |
| न | नहीं | not |
| होइ | होती | proves |
| मुधा | व्यर्थ | vain |
| मुनि | मुनि की | a sage’s |
| भाषा | वाणी | words |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.285
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 582
- सहायक विषय
- कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- मुद्रित पृष्ठ
- 581, 582
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।