अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अजसु होउ जग सुजसु नसाऊ। नरक परौ बरु सुरपुरु जाऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजगत्में चाहे अपयश हो और सुयश नष्ट हो जाय। चाहे [नया पाप होनेसे] मैं नरकमें गिरूँ, अथवा स्वर्ग चला जाय (पूर्व पुण्योंके फलस्वरूप मिलनेवाला स्वर्ग चाहे मुझे न मिले)। और भी सब प्रकारके दु:सह दु:ख आप मुझसे सहन करा लें। पर श्रीरामचन्द्र मेरी आँखोंकी ओट न हों॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 381 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अजसु होउ जग सुजसु नसाऊ। नरक परौ बरु सुरपुरु जाऊ।।
सब दुख दुसह सहावहु मोही। लोचन ओट रामु जनि होंही।।
स्रोत अभिलेख 2.45 · पुस्तक पृ. 381, 381
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अजसु होउ जग सुजसु नसाऊ। नरक परौ बरु सुरपुरु जाऊ।।
English explanation
Let me be disgraced in the world and lose my good name; whether I fall into hell or go to heaven, none of that matters to me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अजसु | अपयश | disgrace |
| होउ | हो जाए | may there be |
| जग | जगत में | in the world |
| सुजसु | सुयश; अच्छी कीर्ति | good reputation |
| नसाऊ | नष्ट हो जाए | may be lost |
| नरक | नरक में | into hell |
| परौ | मैं पड़ूँ | I may fall |
| बरु | अथवा; चाहे | or; whether |
| सुरपुरु | देवताओं के लोक में; स्वर्ग में | to heaven, the gods’ realm |
| जाऊ | मैं जाऊँ | I may go |
2 सब दुख दुसह सहावहु मोही। लोचन ओट रामु जनि होंही।।
English explanation
Make me endure every unbearable sorrow, but let Rama never disappear from my sight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | all |
| दुख | दुख | sorrows |
| दुसह | असहनीय | unbearable |
| सहावहु | सहने को बाध्य करो | make endure |
| मोही | मुझे | me |
| लोचन | आँखों से | from the eyes |
| ओट | ओझल; दृष्टि से बाहर | hidden; out of sight |
| रामु | राम | Rama, Dasharatha’s son |
| जनि | न; मत | not; let not |
| होंही | हों | become; be |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.45
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 381
- सहायक विषय
- श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवध-वासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 381, 381
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।