अरण्यकाण्ड · दोहा 38 (क) · दोहा/सोरठा
तात तीनि अति प्रबल खल काम क्रोध अरु लोभ।
तात तीनि अति प्रबल खल काम क्रोध अरु लोभ।
मुनि बिग्यान धाम मन करहिं निमिष महुँ छोभ।।38(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 3.38 · पुस्तक पृ. 670, 671
भावार्थ और शब्दार्थ
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1तात तीनि अति प्रबल खल काम क्रोध अरु लोभ।
प्रिय लक्ष्मण, काम, क्रोध और लोभ—ये तीन अत्यंत प्रबल दुष्ट हैं।
English explanation
Dear Lakshmana, desire, anger, and greed are three exceedingly powerful villains.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | प्रिय भाई | dear brother |
| तीनि | तीन | three |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| प्रबल | बलवान | powerful |
| खल | दुष्ट | villains |
| काम | काम, वासना | desire, lust |
| क्रोध | क्रोध | anger |
| अरु | और | and |
| लोभ | लोभ | greed |
2 मुनि बिग्यान धाम मन करहिं निमिष महुँ छोभ।।38(क)।।
ये ज्ञान-बोध के धाम मुनियों के मन में भी पल भर में विक्षोभ उत्पन्न कर देते हैं।
English explanation
In an instant, they agitate even the minds of sages who are abodes of realized wisdom.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनियों के | of sages |
| बिग्यान | अनुभूत ज्ञान के | of realized wisdom |
| धाम | धाम, भंडार | abodes |
| मन | मन में | in the minds |
| करहिं | कर देते हैं | cause |
| निमिष | पल | an instant |
| महुँ | में | in |
| छोभ | विक्षोभ, अशांति | agitation |
| क | दोहा-खंड का संदर्भ-चिह्न ‘क’ | reference marker for verse section ‘ka’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 38 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 3.38
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 670, 671
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।