अरण्यकाण्ड · छंद · छंद
रिपु परम कोपे जानि। प्रभु धनुष सर संधानि।।
मूल पाठ
रिपु परम कोपे जानि। प्रभु धनुष सर संधानि।।
छाँड़े बिपुल नाराच। लगे कटन बिकट पिसाच।।
स्रोत अभिलेख 3.2 · पुस्तक पृ. 646, 648
भावार्थ
मूल पाठ के बादशत्रुको अत्यन्त कुपित जानकर प्रभुने धनुषपर बाण चढ़ाकर बहुत-से बाण छोड़े, जिनसे भयानक राक्षस कटने लगे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 647 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 रिपु परम कोपे जानि। प्रभु धनुष सर संधानि।।
English explanation
Knowing the enemies to be intensely angry, the Lord fitted arrows to his bow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रिपु | शत्रुओं को | the enemies |
| परम | अत्यंत | extremely |
| कोपे | क्रोधित हुए | enraged |
| जानि | जानकर | knowing |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| धनुष | धनुष पर | on the bow |
| सर | बाण | arrows |
| संधानि | संधान करके | having fitted and aimed |
2 छाँड़े बिपुल नाराच। लगे कटन बिकट पिसाच।।
English explanation
He released numerous iron arrows; the dreadful demons began to be cut down.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छाँड़े | छोड़े | released |
| बिपुल | बहुत-से | numerous |
| नाराच | लोहे के बाण | iron arrows |
| लगे | लगे; आरंभ हुए | began |
| कटन | कटने | to be cut down |
| बिकट | भयानक | dreadful |
| पिसाच | राक्षस | demons |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 3.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 647
- सहायक विषय
- शूर्पणखाकी कथा, शूर्पणखाका खर-दूषणके पास जाना और खर-दूषणादिका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 646, 648
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।