अरण्यकाण्ड · छंद · छंद
तब चले जान बबान कराल। फुंकरत जनु बहु ब्याल।।
मूल पाठ
तब चले जान बबान कराल। फुंकरत जनु बहु ब्याल।।
कोपेउ समर श्रीराम। चले बिसिख निसित निकाम।।
स्रोत अभिलेख 3.2 · पुस्तक पृ. 646, 648
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब भयानक बाण ऐसे चले, मानो फुफकारते हुए बहुत-से सर्प जा रहे हैं। श्रीरामचन्द्रजी संग्राममें क्रुद्ध हुए और अत्यन्त तीक्ष्ण बाण चले॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 646 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1तब चले जान बबान कराल। फुंकरत जनु बहु ब्याल।।
English explanation
AI draft: The wording of this line is partly uncertain; contextually, terrible arrows flew, as though many snakes were hissing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| चले | चले; उड़ चले | flew forth |
| जान | — | — |
| बबान | बाण; युद्ध में छोड़े गए भयंकर तीर। | Arrows; fierce arrows unleashed in battle. |
| कराल | भयानक | terrible |
| फुंकरत | फुफकारते हुए | hissing |
| जनु | मानो | as though |
| बहु | अनेक | many |
| ब्याल | साँप | snakes |
2 कोपेउ समर श्रीराम। चले बिसिख निसित निकाम।।
English explanation
Rama grew angry in battle; exceedingly sharp arrows flew forth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोपेउ | क्रोधित हुए | became angry |
| समर | युद्ध में | in battle |
| श्रीराम | भगवान राम | Lord Rama |
| चले | चलने लगे | flew forth |
| बिसिख | बाण | arrows |
| निसित | तीखे | sharp |
| निकाम | अत्यंत | exceedingly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 3.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 646
- सहायक विषय
- शूर्पणखाकी कथा, शूर्पणखाका खर-दूषणके पास जाना और खर-दूषणादिका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 646, 648
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।