अरण्यकाण्ड · छंद · छंद
अवलोकि खरतर तीर। मुरि चले निसिचर बीर।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअत्यन्त तीक्ष्ण बाणोंको देखकर राक्षस वीर पीठ दिखाकर भाग चले। तब खर, दूषण और त्रिशिरा तीनों भाई क्रुद्ध होकर बोले—जो रणसे भागकर जायगा,॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 646 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अवलोकि खरतर तीर। मुरि चले निसिचर बीर।।
भए क्रुद्ध तीनिउ भाइ। जो भागि रन ते जाइ।।
स्रोत अभिलेख 3.2 · पुस्तक पृ. 646, 648
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अवलोकि खरतर तीर। मुरि चले निसिचर बीर।।
English explanation
Seeing the exceedingly sharp arrows, the demon warriors turned and fled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अवलोकि | देखकर | having seen |
| खरतर | अत्यंत तीखे | exceedingly sharp |
| तीर | बाण | arrows |
| मुरि | मुड़कर | turning back |
| चले | भाग चले | fled |
| निसिचर | राक्षस | demons |
| बीर | योद्धा | warriors |
2 भए क्रुद्ध तीनिउ भाइ। जो भागि रन ते जाइ।।
English explanation
The three brothers became angry and declared: ‘Whoever flees from battle—’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भए | हो गए | became |
| क्रुद्ध | क्रोधित | angry |
| तीनिउ | तीनों ही | all three |
| भाइ | भाई | brothers |
| जो | जो कोई | whoever |
| भागि | भागकर | fleeing |
| रन | युद्ध | battle |
| ते | से | from |
| जाइ | जाएगा | goes away |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 3.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 646
- सहायक विषय
- शूर्पणखाकी कथा, शूर्पणखाका खर-दूषणके पास जाना और खर-दूषणादिका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 646, 648
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।