अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम रोष पावक अति घोरा। होइहि सकल सलभ कुल तोरा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामजीके क्रोधरूपी अत्यन्त भयानक अग्रिमें तेरा सारा वंश पतिंगा [होकर भस्म] हो जायगा। योद्धा रावण कुछ उत्तर नहीं देता। तब गीध क्रोध करके दौड़ा॥ ९॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 659 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम रोष पावक अति घोरा। होइहि सकल सलभ कुल तोरा।।
उतरु न देत दसानन जोधा। तबहिं गीध धावा करि क्रोधा।।
स्रोत अभिलेख 3.29 · पुस्तक पृ. 658, 660
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम रोष पावक अति घोरा। होइहि सकल सलभ कुल तोरा।।
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2 उतरु न देत दसानन जोधा। तबहिं गीध धावा करि क्रोधा।।
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स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.29
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 659
- सहायक विषय
- जटायु-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 658, 660
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।