मूल पाठ · शब्दार्थ · भावार्थ
उत्तरकाण्ड दोहा · पृ. 963
AI प्रारूपये संदर्भानुसार AI द्वारा बनाए गए शब्दार्थ और भावार्थ हैं। विद्वान की समीक्षा बाकी है; त्रुटियाँ संभव हैं।15 / 15 शब्दों के अर्थ उपलब्ध
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दोहा
।
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संसार; जन्म-मरण का चक्र | worldly existence; the cycle of birth and death | |
| बंधन | bondage | |
| से | from | |
| मुक्त हो जाते हैं | are freed | |
| मनुष्य | people | |
| जपकर | by chanting | |
| जिनका; जिस का | whose | |
| का; संबंधसूचक | possessive marker | |
| नाम | name |
भावार्थ
जिनका नाम जपकर मनुष्य संसार के बंधन से छूट जाते हैं—
By chanting whose name people are freed from the bondage of worldly existence—
॥ ५८॥
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुच्छ; नगण्य | insignificant; paltry | |
| राक्षस; यहाँ इंद्रजित | demon; here, Indrajit | |
| बाँध दिया | bound | |
| नागपाश में; सर्पों के बंधन में | in a serpent-noose | |
| वही; उन्हीं | that very; the same | |
| भगवान राम | Lord Rama |
भावार्थ
उन्हीं राम को एक तुच्छ राक्षस ने नागपाश में बाँध दिया।
That very Rama was bound in a serpent-noose by an insignificant demon.