मूल पाठ · शब्दार्थ · भावार्थ
उत्तरकाण्ड दोहा · पृ. 963
AI प्रारूपये संदर्भानुसार AI द्वारा बनाए गए शब्दार्थ और भावार्थ हैं। विद्वान की समीक्षा बाकी है; त्रुटियाँ संभव हैं।16 / 16 शब्दों के अर्थ उपलब्ध
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दोहा
।
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | then | |
| कुछ | some | |
| समय | time | |
| हंस का | of a swan | |
| शरीर | body | |
| धारण करके | having assumed | |
| वहाँ | there | |
| किया | made | |
| निवास | a dwelling or stay |
भावार्थ
तब मैंने कुछ समय तक हंस का शरीर धारण करके वहाँ निवास किया। (यह एआई द्वारा तैयार अर्थ-प्रारूप है।)
Then, assuming the body of a swan, I stayed there for some time. (This is an AI-generated draft interpretation.)
॥ ५७॥
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आदरपूर्वक | reverently | |
| सुनकर | having heard | |
| रघुकुल के स्वामी श्रीराम के | of Rama, lord of the Raghu lineage | |
| गुण | virtues | |
| फिर | then again | |
| मैं आया | I came back | |
| कैलास पर्वत पर | to Mount Kailasa |
भावार्थ
आदरपूर्वक श्रीराम के गुण सुनकर मैं फिर कैलास लौट आया।
After reverently listening to the virtues of Rama, I returned to Mount Kailasa.