लङ्काकाण्ड · दोहा 33 (ख) · दोहा/सोरठा
तब सोनित की प्यास तृषित राम सायक निकर।
तब सोनित की प्यास तृषित राम सायक निकर।
तजउँ तोहि तेहि त्रास कटु जल्पक निसिचर अधम।।33(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.33 · पुस्तक पृ. 803, 804
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तब सोनित की प्यास तृषित राम सायक निकर।
राम के बाणों का समूह तुम्हारे रक्त के लिए प्यासा है।
English explanation
Rama’s host of arrows thirsts for your blood.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तुम्हारे | your |
| सोनित | रक्त | blood |
| की | की | for |
| प्यास | प्यास | thirst |
| तृषित | प्यासा | thirsty |
| राम | राम के | Rama’s |
| सायक | बाणों का | of arrows |
| निकर | समूह | host |
2 तजउँ तोहि तेहि त्रास कटु जल्पक निसिचर अधम।।33(ख)।।
हे कटु बातें बकने वाले अधम राक्षस, उसी भय से मैं तुम्हें छोड़ देता हूँ।
English explanation
Vile demon who babbles bitter words, I spare you out of that fear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तजउँ | मैं छोड़ देता हूँ | I spare |
| तोहि | तुम्हें | you |
| तेहि | उसी | that very |
| त्रास | भय से | out of fear |
| कटु | कटु बातें | bitter words |
| जल्पक | बकने वाले | one who babbles |
| निसिचर | हे राक्षस | demon |
| अधम | अत्यंत नीच | vile |
| ख | पद्य-संदर्भ चिह्न (ख) | verse reference marker (b) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 33 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 6.33
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 803, 804
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।