लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बालितनय मारुति नल नीला। बानरराज दुबिद बलसीला।।
मूल पाठ
बालितनय मारुति नल नीला। बानरराज दुबिद बलसीला।।
बिटप महीधर करहिं प्रहारा। सोइ गिरि तरु गहि कपिन्ह सो मारा।।
स्रोत अभिलेख 6.98 · पुस्तक पृ. 872, 873
भावार्थ
मूल पाठ के बादबालिपुत्र अंगद, मारुति हनुमान्जी, नल, नील, वानरराज सुग्रीव और द्विविद आदि बलवान् उसपर वृक्ष और पर्वतोंका प्रहार करते हैं। वह उन्हीं पर्वतों और वृक्षोंको पकड़कर वानरोंको मारता है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 872 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
शब्दार्थ उपलब्ध नहींइस पद के शब्दार्थ अभी उपलब्ध नहीं हैं। ऊपर का भावार्थ और मूल पाठ पढ़ें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बालितनय मारुति नल नीला। बानरराज दुबिद बलसीला।।
इस पंक्ति का अर्थ अभी उपलब्ध नहीं है।
2 बिटप महीधर करहिं प्रहारा। सोइ गिरि तरु गहि कपिन्ह सो मारा।।
इस पंक्ति का अर्थ अभी उपलब्ध नहीं है।
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.98
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 872
- सहायक विषय
- घोर युद्ध, रावणकी मूर्च्छा
- मुद्रित पृष्ठ
- 872, 873
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।