लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कोपि कूदि द्वौ धरेसि बहोरी। महि पटकत भजे भुजा मरोरी।।
मूल पाठ
कोपि कूदि द्वौ धरेसि बहोरी। महि पटकत भजे भुजा मरोरी।।
पुनि सकोप दस धनु कर लीन्हे। सरन्हि मारि घायल कपि कीन्हे।।
स्रोत अभिलेख 6.98 · पुस्तक पृ. 872, 873
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब उसने क्रोध करके उछलकर दोनोंको पकड़ लिया। पृथ्वीपर पटकते समय वे उसकी भुजाओंको मरोड़कर भाग छूटे। उसने क्रोध करके हाथोंमें दसों धनुष लिये और वानरोंको बाणोंसे मारकर घायल कर दिया॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 872 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कोपि कूदि द्वौ धरेसि बहोरी। महि पटकत भजे भुजा मरोरी।।
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2 पुनि सकोप दस धनु कर लीन्हे। सरन्हि मारि घायल कपि कीन्हे।।
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स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.98
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 872
- सहायक विषय
- घोर युद्ध, रावणकी मूर्च्छा
- मुद्रित पृष्ठ
- 872, 873
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