अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिपति मोरि को प्रभुहि सुनावा। पुरोडास चह रासभ खावा।।
मूल पाठ
बिपति मोरि को प्रभुहि सुनावा। पुरोडास चह रासभ खावा।।
सीता कै बिलाप सुनि भारी। भए चराचर जीव दुखारी।।
स्रोत अभिलेख 3.29 · पुस्तक पृ. 658, 660
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभुको मेरी यह विपत्ति कौन सुनावे? यज्ञके अन्नको गदहा खाना चाहता है। सीताजीका भारी विलाप सुनकर जड़-चेतन सभी जीव दुखी हो गये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 658 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
शब्दार्थ उपलब्ध नहींइस पद के शब्दार्थ अभी उपलब्ध नहीं हैं। ऊपर का भावार्थ और मूल पाठ पढ़ें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बिपति मोरि को प्रभुहि सुनावा। पुरोडास चह रासभ खावा।।
इस पंक्ति का अर्थ अभी उपलब्ध नहीं है।
2 सीता कै बिलाप सुनि भारी। भए चराचर जीव दुखारी।।
इस पंक्ति का अर्थ अभी उपलब्ध नहीं है।
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.29
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 658
- सहायक विषय
- जटायु-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 658, 660
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।