मूल पाठ · शब्दार्थ · भावार्थ
उत्तरकाण्ड दोहा · पृ. 966
AI प्रारूपये संदर्भानुसार AI द्वारा बनाए गए शब्दार्थ और भावार्थ हैं। विद्वान की समीक्षा बाकी है; त्रुटियाँ संभव हैं।19 / 19 शब्दों के अर्थ उपलब्ध
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दोहा
।
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिना | without | |
| संतों और सज्जनों की संगति | holy company | |
| नहीं | not | |
| भगवान की | of the Lord | |
| कथा; भगवान के चरित का वर्णन | account of the Lord’s deeds | |
| उस हरि-कथा के | that account of the Lord | |
| बिना | without | |
| मोह; अज्ञानजनित आसक्ति | delusion; attachment born of ignorance | |
| नहीं | not | |
| दूर होता | departs |
भावार्थ
एआई प्रारूप: सत्संग के बिना हरि की कथा नहीं मिलती और उस कथा के बिना मोह दूर नहीं होता।
AI draft: Without holy company, one does not receive the account of the Lord; without that account, delusion does not depart.
॥ ६१॥
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोह; अज्ञानजनित आसक्ति | delusion; attachment born of ignorance | |
| दूर हुए | having departed | |
| बिना | without | |
| श्रीराम के | of Lord Rama | |
| चरणों में | at the feet | |
| होता; उत्पन्न होता | arises | |
| नहीं | not | |
| अटल; स्थिर | steadfast | |
| प्रेम; भक्तिपूर्ण लगाव | love; devotional attachment |
भावार्थ
एआई प्रारूप: मोह दूर हुए बिना श्रीराम के चरणों में दृढ़ प्रेम नहीं होता।
AI draft: Until delusion departs, steadfast love for Lord Rama’s feet does not arise.