मूल पाठ · शब्दार्थ · भावार्थ
उत्तरकाण्ड दोहा · पृ. 950
AI प्रारूपये संदर्भानुसार AI द्वारा बनाए गए शब्दार्थ और भावार्थ हैं। विद्वान की समीक्षा बाकी है; त्रुटियाँ संभव हैं।16 / 16 शब्दों के अर्थ उपलब्ध
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दोहा
।
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जीते-जी मुक्ति प्राप्त जन | those liberated while still living | |
| ब्रह्म में परायण या तल्लीन जन | those devoted to or absorbed in Brahman | |
| भगवान के चरित्र और लीलाएँ | the Lord’s deeds and exploits | |
| सुनते हैं | listen to | |
| छोड़कर | leaving aside | |
| ध्यान-साधना | meditation |
भावार्थ
जीते-जी मुक्त और ब्रह्म में तल्लीन जन भी ध्यान छोड़कर भगवान के चरित सुनते हैं। (यह एआई-निर्मित अर्थ-प्रारूप है।)
Those liberated while living and absorbed in Brahman leave meditation to listen to the Lord’s deeds. (This is an AI-generated draft interpretation.)
॥ ४२॥
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो लोग | those who | |
| भगवान हरि की | of Hari, the Lord | |
| कथा में | in the stories | |
| नहीं | not | |
| करते हैं या रखते हैं | have or cultivate | |
| प्रेम या अनुराग | love or affection | |
| उन लोगों | those people | |
| के | of | |
| हृदय | hearts | |
| पत्थर | stone |
भावार्थ
जो हरि की कथा में प्रेम नहीं रखते, उनके हृदय पत्थर हैं।
Those who have no love for the stories of Hari have hearts of stone.