मूल पाठ · शब्दार्थ · भावार्थ
उत्तरकाण्ड दोहा · पृ. 947
AI प्रारूपये संदर्भानुसार AI द्वारा बनाए गए शब्दार्थ और भावार्थ हैं। विद्वान की समीक्षा बाकी है; त्रुटियाँ संभव हैं।16 / 16 शब्दों के अर्थ उपलब्ध
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दोहा
।
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दूसरों के प्रति | toward others | |
| द्रोह करने वाले | those who act maliciously | |
| दूसरे की | another’s | |
| पत्नी | wife | |
| आसक्त | engrossed in | |
| दूसरे का | another’s | |
| धन | wealth | |
| दूसरों की | of others | |
| निंदा | slander |
भावार्थ
एआई-प्रारूप: जो दूसरों से द्रोह करते हैं और दूसरे की पत्नी, दूसरे के धन तथा दूसरों की निंदा में आसक्त रहते हैं—
AI draft: Those who act maliciously toward others and are engrossed in others’ wives, others’ wealth, and slandering others—
॥ ३९॥
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| वे | those | |
| मनुष्य | people | |
| नीच | base | |
| पाप से भरे हुए | steeped in sin | |
| मानव-शरीर | human bodies | |
| धारण किए हुए | wearing | |
| मनुष्यभक्षी राक्षस | man-eating demons |
भावार्थ
वे मनुष्य नीच और पापमय हैं; वे मानव-देह धारण किए हुए नरभक्षी राक्षस हैं।
Such people are base and steeped in sin: they are man-eating demons wearing human bodies.