मूल पाठ · शब्दार्थ · भावार्थ
उत्तरकाण्ड 7.16
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चौपाई
। ।।
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ये सब | all these | |
| मुझे | to me | |
| प्रिय हैं | are dear | |
| नहीं | not | |
| तुम सबके | to you all | |
| समान | equal in dearness | |
| झूठ | falsely | |
| नहीं | not | |
| मैं कहता हूँ | I speak | |
| मेरा | my | |
| यह | this | |
| स्वभाव; रीति | habit; way |
भावार्थ
ये सब मुझे प्रिय हैं, पर तुम्हारे समान नहीं। मैं झूठ नहीं कहता; यह मेरा स्वभाव है।
All these are dear to me, but not as dear as you. I do not speak falsely; this is my way.
। ।।
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सबके | everyone | |
| को; के लिए | to | |
| प्रिय | dear | |
| सेवक | servants | |
| यह | this | |
| सामान्य रीति | general rule | |
| मेरे यहाँ; मेरा | in my case; my | |
| अधिक | greater | |
| सेवकों | servants | |
| के प्रति | toward | |
| प्रेम | affection |
भावार्थ
सेवक सबको प्रिय होते हैं—यह सामान्य रीति है। किंतु मेरा प्रेम अपने सेवकों के प्रति अधिक है।
Servants are dear to everyone—this is the general rule. But my affection for my servants is greater.
दोहा · पृ. 926
अब गृह जाहु सखा सब भजेहु मोहि दृढ़ नेम।
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| गृह | घर | home |
जाहुटिप्पणीबहुवचन आदरार्थक आज्ञा। / Plural or respectful imperative. | जाओ | go |
| सखा | हे मित्रो | O friends |
| सब | सभी | all |
भजेहुटिप्पणीयहाँ आज्ञा या उपदेश का रूप। / An imperative or exhortation here. | भजन करते रहो | continue worshipping |
मोहिटिप्पणीराम स्वयं को संबोधित करते हैं; भजेहु का कर्म। / Refers to Rama himself, the object of worship. | मुझे; मेरा | me |
| दृढ़ | अटल; दृढ़ | steadfast |
नेमटिप्पणीनेम: नियम का अवधी रूप। / Awadhi form of नियम, disciplined observance. | नियम से; नियमित साधना के साथ | with disciplined observance |
भावार्थ
हे सब सखाओ, अब घर जाओ और दृढ़ नियम से मेरा भजन करते रहो। (यह एआई-निर्मित अर्थ का प्रारूप है।)
All my friends, now go home and continue worshipping me with steadfast discipline. (This is an AI-drafted interpretation.)
सदा सर्बगत सर्बहित जानि करेहु अति प्रेम॥ १६॥
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सदा | सदैव | always |
सर्बगतटिप्पणीसर्बगत: सर्वगत का अवधी रूप। / Awadhi form of सर्वगत, all-pervading. | सबमें और सर्वत्र विद्यमान | present in all and everywhere |
सर्बहितटिप्पणीसर्बहित: सर्वहित; यहाँ राम का विशेषण। / सर्वहित, describing Rama as benefiting all. | सबका हित करने वाला | the benefactor of all |
जानिटिप्पणीपूर्ववर्ती मोहि का आशय यहाँ भी है। / The preceding ‘me’ remains the understood object. | जानकर; समझकर | knowing; recognizing |
करेहुटिप्पणीप्रेम करेहु: प्रेम करो; आज्ञार्थक रूप। / With प्रेम: ‘love’; imperative form. | करो | do; show |
| अति | बहुत; अत्यंत | deeply; exceedingly |
| प्रेम | प्रेम | love |
भावार्थ
मुझे सदा सर्वव्यापी और सबका हित करने वाला जानकर मुझसे अत्यंत प्रेम करो।
Knowing me to be always present everywhere and the benefactor of all, love me deeply.