मूल पाठ · शब्दार्थ · भावार्थ
उत्तरकाण्ड दोहा · पृ. 935
AI प्रारूपये संदर्भानुसार AI द्वारा बनाए गए शब्दार्थ और भावार्थ हैं। विद्वान की समीक्षा बाकी है; त्रुटियाँ संभव हैं।15 / 15 शब्दों के अर्थ उपलब्ध
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दोहा
।
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अयोध्या नगरी | the city of Ayodhya | |
| निवासियों | the residents | |
| का | of | |
| सुख | happiness | |
| धन-संपत्ति | wealth and prosperity | |
| प्रचुर समूह | abundance |
भावार्थ
अयोध्या के निवासियों के सुख और संपत्ति की प्रचुरता का वर्णन—
The abundance of happiness and wealth enjoyed by the residents of Ayodhya—
॥ २६॥
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हजार | a thousand | |
| शेषनाग | Shesha, the divine serpent | |
| नहीं | not | |
| वर्णन कर | describe | |
| सकते हैं | can | |
| जहाँ | where | |
| राजा | King | |
| राम, अयोध्या के राजा | Rama, ruler of Ayodhya | |
| विराजमान हैं | reigns |
भावार्थ
हजार शेषनाग भी उसका वर्णन नहीं कर सकते—जहाँ राजा राम विराजमान हैं।
Even a thousand Sheshas could not describe it, where King Rama reigns.