मूल पाठ · शब्दार्थ · भावार्थ
उत्तरकाण्ड दोहा · पृ. 932
AI प्रारूपये संदर्भानुसार AI द्वारा बनाए गए शब्दार्थ और भावार्थ हैं। विद्वान की समीक्षा बाकी है; त्रुटियाँ संभव हैं।15 / 15 शब्दों के अर्थ उपलब्ध
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दोहा
।
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यतियों का दंड; दंड देने का अर्थ भी संकेतित | ascetics’ staff; also evokes punishment | |
| यतियों, संयमी संन्यासियों | of ascetics or renunciants | |
| का | belonging to | |
| नृत्य के भेद; फूट का अर्थ भी संकेतित | distinctions in dance; also evokes division | |
| जहाँ, उस राज्य में | where, in that kingdom | |
| नर्तकों के | of dancers | |
| नृत्य के | of dance | |
| समाज या मंडली में | in the gathering or company |
भावार्थ
एआई-प्रारूप अर्थ: वहाँ दंड केवल यतियों का धारण किया हुआ दंड था और भेद केवल नर्तकों के नृत्य-समाज में था।
AI-draft meaning: There, the rod existed only as the ascetics’ staff, and distinctions only in gatherings of dancers and dance.
॥ २२॥
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जीतो, वश में करो | conquer; bring under control | |
| मन को ही | the mind alone | |
| सुना जाता है | is heard | |
| ऐसा | thus; such | |
| भगवान रामचंद्र | Lord Rama | |
| के | of | |
| राज्य या शासन में | in the kingdom or reign |
भावार्थ
रामचंद्र के राज्य में ऐसा सुनने में आता था कि ‘जीतो’ केवल अपने मन के लिए कहा जाता था।
In Lord Rama’s reign, the call to ‘conquer’ was heard only with reference to one’s own mind.